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ड्रेजिंग कार्पोरेशन ऑफ़ इण्डिया लिमिटेड

यह निगम

ड्रेजिंग कार्पोरेशन ऑफ़ इण्डिया लिमिटेड, या डीसीआई, निकर्षण व्यापार करनेवाली एक “लघु रत्न” भारतीय सार्वजनिक क्षेत्रीय इकाई है| डीसीआई प्रधानतया भारतीय समुद्री पत्तनों के लिए निकर्षण करता है| यह निर्वाहगत निकर्षण, निर्माणगत निकर्षण, तट पोषण और भूमि उद्धार के कार्यों में लिप्त है|

हमारे कार्यालय

संगठन के बारे में, संक्षेप में

ड्रेजिंग कार्पोरेशन ऑफ़ इण्डिया लिमिटेड (डी.सी.आई.) सन्‌ 1976 में भारत में, इस देश के महा पत्तनों के लिए निकर्षणगत सेवाओं की व्यवस्था करने हेतु, स्थापित किया गया । निकर्षण और समुद्री विकास क्षेत्र में डी.सी.आई. एक प्रधान संगठन है । डी.सी.आई. के लिए वे सभी उपस्कर हैं जिनके सहारे यहभारत और विदेश में अपने उपयोगकर्ताओं के लिए सभी तरह की निकर्षण और संबंधित सेवाएँ कर सकता है और राष्ट्रीय विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकता है । इसका प्रधान कार्यालय व्यूहनीतिगत तौर पर भारत के पूर्वी तट के विशाखपट्‌नम में स्थित है । डी.सी.आई. महा और लघु पत्तनों, भारतीयनौसेना, मात्स्यकी बंदरगाहों और अन्य समुद्री संगठनों के जलमार्गों में लगातार वांछित गहराई सुनिश्चत करने में मददगार है । इसके आगे, यह भारत के 7500 कि.मी. लम्बे समुद्री तट पर स्थित,चाहे नई बंदरगाहों के सृजन में निर्माणगत निकर्षण हो या विद्यमान बंदरगाहों को गहरा करने या विविध पत्तनों में अपेक्षित गहराई बनाए रखने के लिए निर्वाहगत निकर्षण हो, विविध रीतियों में इस देश की सेवा कर रहा है ।

डी.सी.आई. के लिए अत्याधुनिक और सुसंस्कृत नौबेड़ा है जिसमें तीन कर्त्तक चूषण निकर्षक हैं और बारहअनुगामी चूषण निकर्षक हैं ।

डी.सी.आई. भारत सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करनेवालीकम्पनीहै ।

डी.सी.आई. अनुसूची ख और लघु रत्न वर्ग-1 का सार्वजनिक क्षेत्रीय उद्यम है ।

डी.सी.आई. भारत के उन सरकारी उपक्रमों में से एक है जिनमें भारत सरकार ने अपनी शेयरधारिता को विनिवेशित किया है । इस कम्पनीके शेयरों को भारत में दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता और राष्ट्रीय शेयर बाज़ारों मेंसूचीकृत किया गया है ।

ध्येय

इस देश के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार की प्रोन्नति के लिए समेकित निकर्षण और संबंधित समुद्री सेवाओं, तट पोषण, भूमि उद्धार, अंतर्देशीय निकर्षण, पर्यावरण संरक्षण की व्यवस्था करना और निकर्षण क्षेत्र में विश्व स्तरीय प्रमुख संस्था बनना|

दूरदर्शिता

निम्नलिखित बिंदुओं पर दृष्टि केंद्रित करते हुए निकर्षण सेवाओं की व्यवस्था करने में अभिप्रेरित निष्पादकों के दल के रूप में उभरना:

1) भारतीय निर्वाहगत निकर्षण विपण के 80% तक डीसीआई की हिस्सेदारी को प्रगामी रूप से बढ़ाने और भारतीय निर्माणगत निकर्षण विपण में हिस्सेदारी को बढ़ाने के द्वारा 2020 तक नव रत्न कम्पनी बनना|

2) समेकित निकर्षण सेवाओं की व्यवस्था करने में विश्व में अपने अस्तित्व को कायम रखना|

3) निगमित अभिशासन के उत्कृष्ट मानकों को अपनानाऔर अनुपालन करना|

उद्देश्य

1) भारतीय निकर्षण क्षेत्र में अपनी ‘नम्बर-1’ की स्थिति को बनाए रखना|

2) प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियों के साथ संयुक्त अभियानों का गठन करने और / या जलयानों को भाड़े पर देने के द्वारा विश्व विपण में प्रवेश करना|

3) प्रशिक्षण और भर्ती का कार्यक्रम जारी रखने के द्वारा इस कम्पनी की मानव संसाधनगत पूँजी को बढ़ाना|

4) डीसीआई कीएफ.आई.आई.टी. परियोजना अर्थात्‌ सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा डीसीआई के कार्यकारी समेकन के जरिए इस कम्पनी के सभी कार्यकारी क्षेत्रों में समेकित ई-अभिशासन को कार्यान्वित करना|

डीसीआई – उज्ज्वल भविष्य की ओर

बढ़ती जा रही भविष्य की माँगों को पूरा करने हेतु अपनी निकर्षण क्षमता को बढ़ाने और अपने विद्यमान नौबेड़े की तरक्की तथा भारत और विदेश में अपनी सेवाएँ विस्तृत करने के लिए डी.सी.आई. के लिए अधिक अनुगामी चूषण हॉपर निकर्षक और कर्तक चूषण निकर्षक खरीदने की उत्साह भरी योजनाएँ हैं ।

डी.सी.आई. के लिए व्यावसायिक रूप से योग्यताप्राप्त और अनुभवी समर्पित कर्मचारीगण है, जो इस संगठन की आधारभूत शक्ति बनते हैं, और डी.सी.आई. भविष्य में किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना करने के लिए उद्यत है और बड़े विश्वास के साथ उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है ।

प्रशासनिक गठन